जीवन चलने का नाम
कल 2012 था और आज 2013 की नयी सुबह!
वास्तविकता यह है कि इस एक वर्ष के बुढ़ाने में हम अधिक अनुभवप्रज्ञ हुए होंगे? अधिक जानकारियों से लैस हुए होंगे? हमारे पास अधिक आत्मानुशासन आया होगा? हम और अधिक शक्तिशाली हुए होंगे ......बल बुद्धि और विवेक से?
पर इन परिवर्तनों का हम अपने लिए, आपके लिए और समाज के लिए क्या उपयोग कर सकें........सबसे अधिक यही महत्वपूर्ण है। हम शिक्षकों और चिट्ठाकारों की इस रूप में समाज में भूमिका और प्रभावी होनी चाहिए! अपने पास, पड़ोस और परिवेश में हम आप क्या अधिक और सकारात्मक कर सकते हैं यह चिंतन इस नूतन वर्ष 2013 में भी चलता रहे ऐसी परमात्मा से उम्मीद है?
समाज में जो जैसा है की चलताऊ भावना से परे हटकर कुछ और अच्छा बनाने की सतत कोशिश की लौ जलती रहे ...... इस भावना से ही हम सबको नए वर्ष में प्रवेश करना चाहिए। आइये हम सब शपथ लें कि हम सब शिक्षक परिवर्तन के वाहक बनेंगे ......परिवर्तन अपने अन्दर, परिवर्तन अपने विद्यालयों में, परिवर्तन अपने परिवेश में और परिवर्तन अपने समाज में।
बस इतना सा ही ख़्वाब है !
कुल मिलाकर मौजा ही मौजा हो।
वर्ष 2013 तुम्हारा स्वागत है!
आप सबको शुभकामनाएं!
आप सबको शुभकामनाएं!

